हमारे बारे में
उस दुआ के लिए बनाया गया, जो आपने रात 3 बजे माँगी और कभी लिखी नहीं।
Dua Diary की शुरुआत एक सीधी-सी बात समझ में आने से हुई: हमारी सबसे सच्ची दुआएँ — सजदे में, गाड़ी में, रात 3 बजे जब नींद नहीं आती — लगभग हमेशा खो जाती हैं। इसलिए नहीं कि उनमें सच्चाई नहीं थी। इसलिए कि उन्हें रखने की कोई जगह नहीं थी।
हमने ऐसा ऐप ढूँढा जो इस काम के लिए ठीक लगे। कुछ शांत, निजी और इस्लामी — न कोई हवाले देखने की किताब, न कोई आम नोट्स ऐप, बल्कि ख़ास दुआ माँगने के अमल के लिए बनाया गया एक साथी। हमें ऐसा कुछ नहीं मिला। तो हमने तय किया कि इसे ख़ुद बनाएँगे।
हम क्या मानते हैं
दुआ इस्लाम के सबसे क़रीबी अमलों में से एक है। यह अल्लाह से सीधी बातचीत है — बिना किसी वास्ते के, बिना किसी पाबंदी के, और हर वक़्त मुमकिन। फिर भी हममें से बहुतों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसका कोई ठिकाना नहीं है।
हम मानते हैं कि अपनी दुआएँ लिखना — उनकी ओर लौटना, इस पर ग़ौर करना कि वे कैसे क़बूल हुईं, उनके इर्द-गिर्द एक पक्का सिलसिला बनाना — अल्लाह से आपके रिश्ते को बदल देता है। दिखावे से नहीं। दिल की मौजूदगी से।
Dua Diary इसी अमल को सहारा देने के लिए बना है। ख़ामोशी से, इरादे के साथ, बिना शोर के।
हमारा वादा
- — आपकी निजी डायरियाँ निजी हैं, और साझा डायरियाँ सिर्फ़ वही लोग देखते हैं जिनके साथ आप उन्हें शेयर करते हैं। हम आपकी दुआएँ न कभी बेचेंगे, न किसी से बाँटेंगे।
- — कोई विज्ञापन नहीं। कोई स्पॉन्सर्ड कॉन्टेंट नहीं। कभी नहीं।
- — हमारी लाइब्रेरी की हर दुआ बुनियादी इस्लामी स्रोतों से जाँची-परखी गई है।
- — यह प्रोडक्ट हमेशा शांत और अपने मक़सद पर टिका रहेगा — हम ग्रोथ के नाम पर शोर नहीं जोड़ेंगे।
कोई सवाल? हमें लिखें: hello@duadiary.app